IVF करवाने वाले जोड़ों के मन में IVF से जुड़े कई सवाल रहते है जो वे जानना चाहते है की आईवीएफ भ्रूण स्थानांतरण के दिन क्या होता है | embryo यानि की भ्रूण के स्थानांतरण की प्रक्रिया क्या होती है और कितने दिन के भ्रूण को गर्भाशय में ट्रांसफर किया जाता है | इसके अलावा कुछ जोड़े यह जानना चाहते है की 3 दिन और 5 दिन के भ्रूण में से कौनसे भ्रूण को गर्भाशय में स्थानांतरण करने से अच्छे परिणाम प्राप्त होते है | आज के इस लेख में हम इस विषय के बारे में डिटेल से जानने की जानेंगे |
भ्रूण स्थानांतरण प्रक्रिया क्या होती है ?
जब संतान की चाहत रखने वाले जोड़े IVF के लिए आते है तो stimulatin injection के द्वारा अंडाशय में फॉलिकल को mature होने के बाद अंडे प्राप्त किये जाते है साथ ही पुरुष पार्टनर से शुक्राणु प्राप्त किये जाते है | इसके बाद ICSI या IVF प्रक्रिया द्वारा उन अंडो को शुक्राणु के द्वारा निषेचित करवाया जाता है | निषेचित होने के बाद उन निषेचित अंडे जो की भ्रूण कहलाते है उन्हें 3 से लेकर 5 दिन होने तक उनकी देखरेख की जाती है और स्वस्थ भ्रूण को एक कैथेटर के द्वारा गर्भाशय में छोड़ा जाता है | जहाँ पर भ्रूण गर्भाशय की दिवार से आरोपित होता है और प्रेगनेंसी कंसीव हो पाती है |
भ्रूण स्थानांतरण दिन कब होता है
महिला से प्राप्त फॉलिकल जो की 5 से लेकर 15 भी हो सकते है उन्हें प्राप्त करने के बाद उनके तरल को अलग करने के बाद अंडो को प्राप्त किया जाता है | यदि मान लेते है की 10 फॉलिकल प्राप्त हुए है तो जरुरी नहीं की उनमें से प्रत्येक में अंडा प्राप्त हो | mature अंडे की संख्या 70 से लेकर 80 तक हो सकती है |
इन अंडो से शुक्राणु को निषेचित करने के बाद लैब में इन पर प्रतिदिन देखरेख की जाती है | यह देखा जाता है की सभी भ्रूण सही तरह से विकसित तो हो रहे है ना | लेकिन इनमें से कुछ अंडे प्राथमिक अवस्था तक भी नहीं पहुंच पाते है | 3 दिन तक आधे के लगभग ही अंडे सही विकसित हो पाते है |
इस अवस्था तक पहुंचने तक यदि कम भ्रूण बचे है तो फिर इन अंडो को तीसरे दिन ही गर्भाशय में स्थानांतरित कर दिया जाता है | यदि भ्रूण अधिक संख्या में है तो उन्हें और आगे तक की प्रक्रिया यानि की Blastocyst तक देखा जाता है | इस अवस्था तक पहुंचने के बाद भ्रूण बहुत अच्छी स्थिति के हो जाते है और उनसे IVF की सफलता की सम्भावना भी बहुत अधिक हो जाती है | ब्लास्टोसिस्ट होने के बाद इन भ्रूण को कैथेटर के द्वारा गर्भाशय में स्थानांतरण किया जाता है |
भ्रूण की स्थिति
अंडो को शुक्राणु से निषेचित होने के बाद पहले दिन देखा जाता है की कितने अंडे पहले दिन फर्टिलाइज हुए है | दूसरे दिन देखा जाता है की भ्रूण विकसित हो रहा है या नहीं | इसमें देखा जाता है की वह clevage कर रहा है या नहीं | यहाँ cleavage यानि की कई सेल्स में बढ़ रहा है या नहीं | इस लेवल पर भ्रूण 4 से 6 सेल्स तक बढ़ जाता है | इस अवस्था तक 80 से 90 प्रतिशत अंडे Cleavage कर पाते है | इसे cleavage rate कहा जाता है | इस लेवल पर भ्रूण की क्वालिटी को भी Check किया जाता है | यह देखा जाता है की भ्रूण के सभी सेल्स सही तरह से तो बढ़ रहे है यानि की उन सेल्स में कोई दिक्कत तो नहीं है |
भ्रूण स्थानांतरण दिन के बाद
भ्रूण को जब गर्भाशय में छोड़ा जाता है उसके बाद आगे की स्थिति में भ्रूण को गर्भाशय की दिवार से चिपकना होता है | यह पूरी प्रक्रिया प्राकृतिक रूप से संपन्न होती है और अभी तक ऐसी कोई तकनीक नहीं बानी है जिसके द्वारा इसे नियंत्रित किया जा सके या यह तय किया जाये की भ्रूण गर्भाशय की दिवार से चिपक जाये | भ्रूण अपने आप ही गर्भाशय की दिवार से चिपकता है| इसी प्रक्रिया से IVF की सफलता और असफलता तय होती है | यदि भ्रूण गर्भाशय की दिवार से चिपक जाता है तो वह भ्रूण विकसित होने लगता है और प्रेगनेंसी कंसीव हो जाती है |
निष्कर्ष
आशा है आप जान गए होंगे की आईवीएफ उपचार में भ्रूण स्थानांतरण दिन क्या होता है और IVF की भ्रूण स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया क्या है | यदि आप IVF उपचार के बारे में विचार कर रहे है तो आस्था फर्टिलिटी में हम आपको बेहतर IVF उपचार का विश्वास दिलाते है | आस्था फर्टिलिटी में हम आपकी सभी जांच करने के बाद सही IVF ट्रीटमेंट के बारे में सुझाव देते है | यहाँ आपको मिलती है विश्वस्तरीय IVF उपचार एक बेहतर माहौल के साथ | तो अपनी IVF से जुड़े सभी सवालों के जवाब पाने और बेहतर फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के लिए अपना अपॉइंटमेंट आज ही बुक करें |



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