Prolactin Test शरीर में Prolactin हॉर्मोन की मात्रा का पता लगाने के लिए किया जाता है।
हम सब जानते हैं कि मानव शरीर में hormones का बहुत बड़ा योगदान होता है। Hormones हमारे शरीर में रासायनिक संदेशवाहक होते हैं जो न सिर्फ हमारे मूड और ऊर्जा को प्रभावित करते हैं बल्कि कई hormones हमारी प्रजनन क्षमता में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
ऐसा ही एक अत्यंत महत्वपूर्ण हॉर्मोन है Prolactin.
हालाँकि Prolactin हॉर्मोन महिला और पुरुष दोनों के शरीर में पाया जाता है परन्तु महिलाओं के शरीर में इसका अहम योगदान होता है। prolactin Hormone स्तनपान और प्रजनन से समबन्धित अन्य कार्यों को नियमित करने में मदद करता है। National Library of Medicine में प्रकाशित एक research के अनुसार प्रोलैक्टिन टेस्ट को पुरुषों और महिलाओं दोनों में बांझपन (infertility) के संभावित कारणों का पता लगाने के लिए एक आवश्यक निदान उपकरण माना जाता है। यह टेस्ट सही उपचार दिशा तय करने और गर्भधारण (conception) की संभावना बढ़ाने में मदद करता है।
ऐसे में जो couples pregnancy plan कर रहे हैं उनके लिए प्रोलाक्टिन test करना अत्यंत आवश्यक है।
Dr. Namita Kotia, Aastha Fertility Care की विशेषज्ञ, जिन्हें reproductive medicine और IVF में 18+ वर्षों का अनुभव है, का कहना है कि अगर शरीर में Prolactin की मात्रा असामान्य अर्थात कम या ज्यादा हो जाए तो यह ovulation, fertility, और menstrual cycle को प्रभावित करता है।
अगर आपके मन में भी कई सवाल हैं जैसे prolactin test क्या होता है (Prolactin Test in Hindi) और prolactin कितना होना चाहिए, तो इस ब्लॉग को अंत तक पढ़ें।

प्रोलैक्टिन क्या होता है?(Prolactin test kya hota hai)
Prolactin एक प्रोटीन हार्मोन है जो मुख्य रूप से pituitary gland से बनता है। हालांकि यह हार्मोन पुरुषों और महिलाओं दोनों में होता है, लेकिन दोनों में इसका प्रभाव और भूमिका बहुत अलग है।
महिलाओं में यह हार्मोन दूध उत्पादन और स्तन विकास के लिए जिम्मेदार होता है, खासकर गर्भवती और स्तनपान कर रही महिलाओं में। जबकि पुरूषों में prolactin हॉर्मोन testosterone level और sperm production के संतुलन में भूमिका निभाता है।
प्रोलैक्टिन टेस्ट क्यों जरूरी है? (Prolactin test in hindi and why it’s important)
Prolactin हार्मोन, स्तनपान के दौरान दूध उत्पादन के साथ-साथ कई अन्य तत्वों जैसे menstrual cycle को भी नियंत्रित करता है। इसलिए इस हार्मोन का सामान्य स्तर बनाए रखना बहुत जरूरी है। यही स्तर जांचने के लिए Prolactin Test की आवश्यकता होती है। अगर यह स्तर सामान्य नहीं होता है, तो आपकी समग्र स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है।
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अगर आप अनियमित मासिक धर्म और किसी भी तरह की प्रजनन समस्याओं का अनुभव कर रहे हैं, तो आपको यह टेस्ट कराना जरूरी है ताकि आप अपने हार्मोनल असंतुलन को पहचान सकें और तुरंत आवश्यक उपचार ले सकें।
वहीँ पुरुषों में सामान्य रूप से Prolactin का स्तर नियंत्रित रहता है, लेकिन अगर यह असामान्य रूप से बढ़ जाए, तो यह कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
प्रोलैक्टिन टेस्ट की प्रक्रिया कैसे होती है?

Prolactin Test की प्रक्रिया काफी सरल और संक्षिप्त होती है। यह एक सामान्य रक्त परीक्षण है, जो डॉक्टरों को Prolactin हार्मोन का स्तर या किसी अन्य स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं का पता लगाने में मदद करता है।
आइए जानते हैं इस टेस्ट की प्रक्रिया:
- समय (Timing): यह टेस्ट आमतौर पर सुबह किया जाता है — जागने के 3–4 घंटे बाद। ऐसा इसलिए क्योंकि सुबह के समय हार्मोन स्तर में प्राकृतिक बदलाव होते हैं।
- ब्लड सैंपल लेना (Blood Draw): आपके हाथ की नस से थोड़ी मात्रा में खून लिया जाता है। यह सैंपल आगे की जांच के लिए प्रयोगशाला (lab) में भेजा जाता है।
- प्रयोगशाला विश्लेषण (Laboratory Analysis): प्रयोगशाला में खून के सैंपल से प्रोलैक्टिन हार्मोन का स्तर मापा जाता है।
- परिणाम (Results): रिपोर्ट में आपके प्रोलैक्टिन स्तर को सामान्य सीमा (आमतौर पर 25 ng/mL से कम) से तुलना की जाती है।
- डॉक्टर से परामर्श (Consultation) : डॉक्टर आपके टेस्ट परिणाम को समझाते हैं और जरूरत पड़ने पर आगे की जांच या उपचार की सलाह देते हैं।
टेस्ट से पहले किसी भी प्रकार का तनाव नहीं लेना चाहिए और भारी भोजन से बचना चाहिए।
प्रोलैक्टिन कितना होना चाहिए (Normal Levels)
Prolactin के स्तर हर मानव शरीर में अलग होते हैं, ये स्तर हर व्यक्ति की उम्र, लिंग और आंतरिक स्वास्थ्य पर निर्भर करते हैं।
- Males: 3 – 15 ng/mL
- Pregnant females: 34 – 386 ng/mL
- Non-pregnant women: 4 – 23 ng/mL
प्रोलैक्टिन हार्मोन क्यों बढ़ता है?
High level Prolactin को Hyperprolactinemia कहा जाता है। रक्त में prolactin का स्तर बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे Pituitary gland में ट्यूमर, कुछ विशिष्ट दवाओं का असर, तनाव, नींद की कमी, गर्भावस्था और स्तनपान। अगर आप अनियमित पीरियड्स, बांझपन, स्तनों से दूध का स्राव बिना स्तनपान किए, सिरदर्द, मूड स्विंग्स जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तो इनका कारण उच्च prolactin स्तर हो सकता है।
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प्रोलैक्टिन स्तर बढ़ने के प्रभाव
High Prolactin Hormone (Hyperprolactinemia) body ke reproductive system ko directly affect karta hai. Saath hi saath yeh ek vyakti ki overall health ko bhi disturb kar sakta hai.
Mahilao mai prabhav: High level of prolactin hormone mahilao mai sabse jyda unki menstural cycle ko affect karti hai jiske kaaran unko irregular periods ka samna karna padta hai. Eske alawa, high level of prolactin hormone se infertility, galactorrhea and low libido jaise problems bhi arise ho sakti hai.
Purusho mai prabhav: Males mai agar prolactin hormone ka level high ho toh yeh females se kaafi differently unko affect karta hai. Hyperprolactinemia males mai kayi problems arise kardeta hai jaise erectile dysfunction, breast size badna (Gynecomastia), low sperm count and sexual intercourse (libido) ki desire ko kam karta hai.
Prolactin hormone aapki body mai bhot important role play karta hai. Aapke reproductive cycle se lekar overall health par eska asar dekha jaata hai. Prolactin ke jyda ya kam hone par human body mai major changes dekhe jaate hai jaise breast size badna, dizziness rahna aur low libido rahna.
Aastha Fertility Care mai hum apne patients ko prolactin se jude har sawal, doubt ko clear kar unko ek healthier lifestyle ke towards guide karte hai, and required treatments provide karte hai.
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FAQs: Prolactin test kya hota hai?
Prolactin हार्मोन बढ़ने से क्या होता है?
Prolactin हार्मोन बढ़ने से महिलाओं में पीरियड्स अनियमित या बंद हो सकते हैं, बिना गर्भवस्था या स्तनपान के स्तनों से दूध आ सकता है और योनि सूखने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
Prolactin की कमी से कौन-कौन सी बीमारी होती है?
Prolactin की कमी एक दुर्लभ समस्या है, जिसके कारण lactate failure और अन्य हार्मोनल कमी भी हो सकती है, जैसे GH deficiency, gonadotropin deficiency और central hypothyroidism।
महिलाओं में Prolactin कितना होना चाहिए?
गैर गर्भवती महिलाओं में prolactin का स्तर 5 से 25 ng/mL होना चाहिए और गर्भावस्था के दौरान यह स्तर 80 से 400 ng/mL तक बढ़ जाता है।
क्या Prolactin होने से सिरदर्द होता है?
हां, उच्च prolactin होने से सिरदर्द, चक्कर आना और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं।




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