कभी सोचा है, इंसानी जीवन की शुरुआत असल में होती कैसे है? सब कुछ शुरू होता है एक बेहद छोटी कोशिका से जिसे हम शुक्राणु (Sperm Meaning in Hindi) या स्पर्म (sperm) कहते हैं । जिस तरह महिला की प्रजनन प्रणाली में नए मानव जीवन के लिए अण्डों का निर्माण होता है ठीक उसी प्रकार पुरुष की प्रजनन प्रणाली में ‘Sperm’ सबसे अहम रोल निभाता है।
Dr. Namita Kotia, Aastha Fertility Care की विशेषज्ञ, जिन्हें reproductive medicine और IVF में 18+ वर्षों का अनुभव है, का कहना है कि स्पर्म पुरुष की प्रजनन कोशिका (male reproductive cell) होती है। इसका मुख्य काम मादा (female) के अंडाणु (egg cell) के साथ मिलकर भ्रूण (fetus) बनाना और नए जीवन की शुरुआत करना है। दूसरे शब्दों में, शुक्राणु ही वह माध्यम है जो पुरुष के आनुवंशिक सामग्री (genetic material/DNA) को अगली पीढ़ी तक लेकर जाते है।
अगर आपके मन में भी कई सवाल हैं जैसे स्पर्म होता क्या है, स्पर्म का उत्पादन कैसे होता है, मेल इनफर्टिलिटी से जुडी problems और उसके treatments, तो इस ब्लॉग के अंत तक आपके सभी doubts दूर हो जायेंगे।
आइये विस्तार से इस टॉपिक को आसान भाषा में समझते हैं।
स्पर्म क्या होता है? (Sperm meaning in hindi)
Sperm meaning in hindi – स्पर्म (sperm) को हिंदी में शुक्राणु कहते हैं। ये पुरुष के शरीर की सबसे अहम प्रजनन कोशिका (reproductive cell) है। इसका असल काम मादा (female) के अंडाणु (egg cells) से मिलकर नए जीवन की शुरुआत करना है। शुक्राणु वीर्य (semen) नाम के गाढ़े तरल में रहता है, जो पुरुष स्खलन (ejaculation) के वक्त बाहर निकालता है। वीर्य (semen) शुक्राणु (sperm) को पोषण देता है, जैसे उसे ऊर्जा मिलती है और उसे मादा (female) के प्रजनन मार्ग (reproductive tract) में तैरने में मदद करता है, ताकि वो सीधे अंडाणु (egg cells) तक पहुँच सके और उसे निषेचित (fertilisation) कर सके।
असल में, शुक्राणु ही वो ज़रिया है जिससे पुरुष के डीएनए (DNA) और आनुवंशिक गुण (genetic traits) अगली पीढ़ी तक पहुँचते हैं। इसीलिए, अगर परिवार बढ़ाना है तो शुक्राणु की संख्या और उसकी गति दोनों का अच्छा होना बहुत जरूरी है।
शुक्राणु का उत्पादन कैसे होता है? (How is sperm produced?)
शुक्राणु बनना कोई सीधी-सादी प्रक्रिया नहीं है। इसे शुक्राणुजनन (Spermatogenesis) कहते हैं, और ये सब पुरुषों के अंडकोष (Testicles) में चलता रहता है। एक शुक्राणु को पूरी तरह तैयार होने में करीब 72 दिन लगते हैं। हैरानी की बात है, पर ये प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। इसमें टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) जैसे हार्मोन का रोल बड़ा अहम है।
जब शुक्राणु बन जाते हैं, तो वे एपिडीडिमिस (Epididymis) नाम की जगह पर इकट्ठा होते हैं। यहीं पर ये पूरी तरह mature होते हैं और महिला के शरीर में तैरने की या ट्रेवल करने की ताकत हासिल करते हैं।
स्पर्म का कार्य (Function of Sperm)

अब अगर बात करें स्पर्म के काम की तो इनका असली काम निषेचन (Fertilization) होता है। सरल भाषा में कहें तो शुक्राणु को मादा के अंडाणु तक पहुँचकर उससे मिलना होता है। वहीं पहुँचकर यह अंडाणु को निषेचित करता है और इसी प्रक्रिया से युग्मनज (Zygote) बनता है। यही युग्मनज आगे चलकर भ्रूण बनता है और अंत में बच्चा विकसित होता है। स्पर्म अपने सिर में डीएनए (DNA) लेकर जाता है, जो बच्चे की कद-काठी, रंग-रूप और अन्य आनुवंशिक गुणों को निर्धारित करता है।
स्पर्म की संरचना (Structure of Sperm)
एक शुक्राणु एक बहुत ही छोटी, लेकिन बेहद जटिल कोशिका होती है। इसकी संरचना को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा जा सकता है:
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सिर (Head) – डीएनए या आनुवंशिक सामग्री
- इसमें डीएनए (DNA) यानी आनुवंशिक सामग्री होती है।
- यही हिस्सा निषेचन (fertilisation) के वक्त अंडाणु में घुसता है।
- सिर के आगे एक टोपी जैसी चीज़ होती है, जिसे एक्रोसोम (Acrosome) कहते हैं।
- इसमें खास एन्जाइम होते हैं, जो अंडाणु की बाहरी परत को भेदने में मदद करते हैं।
मध्य भाग (Midpiece) – ऊर्जा का स्रोत
- ये सिर और पूँछ के बीच रहता है।
- इसे शुक्राणु का पावरहाउस कह सकते हैं, क्योंकि इसमें माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) होते हैं।
- जो शुक्राणु को तैरने के लिए जरूरी ताकत देते हैं।
पूँछ (Tail) – स्पर्म की गति का कारण
- ये सबसे लंबा हिस्सा है, इसे फ्लैगेला (Flagella) भी कहते हैं।
- ये पूँछ एक चाबुक की तरह हिलती है, जिससे शुक्राणु को तरल पदार्थ (वीर्य) में आगे बढ़ने की रफ्तार (motility) मिलती है।
- इसी वजह से शुक्राणु अंडाणु तक पहुंचने में कामयाब होता है।
स्पर्म से जुड़ी सामान्य समस्याएं (Common Sperm Problems)
अब अगर आप और आपके पार्टनर को कंसीव (concieve) करने में दिक्कत आ रही है, तो वजह शुक्राणु से जुड़ी कुछ समस्याएं हो सकती हैं।
- कम शुक्राणु संख्या (Low Sperm Count) (Oligospermia): Oligospermia ka मतलब, वीर्य में प्रति मिलीलीटर (per ml) 15 मिलियन से कम शुक्राणु अगर है तो इसे काम संख्या कहा जाता है।
- कमजोर गति (Low Motility) (Asthenozoospermia): इसका मतलब शुक्राणु पर्याप्त गति से या सही दिशा में तैर नहीं रहे, तो अंडाणु तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
- असामान्य आकार (Abnormal Morphology) (Teratozoospermia): अगर शुक्राणु का सिर, मध्य भाग या पूँछ ठीक नहीं है, तो निषेचन (Fertlisation) दिक्कत आती है।
- वीर्य में शुक्राणु न होना (Azoospermia): ये ऐसी स्तिथि है जहा स्खलन (ejaculation) वाले वीर्य में बिल्कुल भी शुक्राणु मौजूद नहीं हो।
शुक्राणु की कमी के उपचार (Sperm Deficiency Treatments)
अब अगर हम इलाज की बात करें, तो शुक्राणु की कमी या खराबी के लिए कई इलाज हैं। ये इलाज समस्या की वजह और गंभीरता पर निर्भर करता है:
- लाइफस्टाइल बदलना: जैसे धूम्रपान-शराब छोड़ना, अच्छा खाना, और तनाव कम करना।
- हार्मोनल थेरेपी: अगर वजह हार्मोनल गड़बड़ी है, तो दवाएं या इंजेक्शन दिए जा सकते हैं ।
- कुछ दवाएं: जो शुक्राणु की क्वालिटी और काउंट सुधारने में मदद करती हैं।
- वीर्य पुनर्प्राप्ति (Azoospermia): Azoospermia में, सर्जरी से सीधे अंडकोष से शुक्राणु निकाले जाते हैं।
- IUI (इंट्रायूटेराइन इनसेमिनेशन): इसमें बढ़िया शुक्राणु सीधे महिला के गर्भाशय में डाले जाते हैं।
- IVF या ICSI: गंभीर मामलों में IVF या ICSI का सहारा लिया जाता है, जिसमें शुक्राणु को सीधा अंडाणु के अंदर इंजेक्ट किया जाता है।
Sperm Motility meaning in Hindi
Sperm Motility meaning in Hindi – मतलब, शुक्राणु गतिशीलता या शुक्राणु की चाल। सरल शब्दों में, यह दर्शाता है कि शुक्राणु कितनी तेजी और सीधाई से अंडाणु की ओर बढ़ सकता है। कंसीव ( concieve ) करने के लिए, शुक्राणु को योनि से होते हुए गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब तक तैरना होता है, और ये तभी मुमकिन है जब उनकी चाल (motility) सही हो।
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निष्कर्ष
शुक्राणु सिर्फ एक कोशिका नहीं हैं, ये असल में नए जीवन की शुरुआत करते हैं। जैसे हम जानते हैं, उनकी संख्या, गति और सही आकार, ये सब मिलकर गर्भधारण (conceiving) में बड़ी भूमिका निभाते हैं। कई बार लोग पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य को हल्के में ले लेते हैं, लेकिन सच ये है कि आपकी रोजमर्रा की आदतें जैसे संतुलित खाना, थोड़ी-बहुत कसरत, और तनाव कम रखना सीधे-सीधे शुक्राणु की क्वालिटी पर असर डालती हैं।
अगर आपको या आपके पार्टनर को गर्भधारण में दिक्कत आ रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें। मेडिकल साइंस ने अब इस फील्ड में काफी तरक्की कर ली है। शुक्राणु की कमी या उनकी धीमी चाल जैसी समस्याओं का इलाज अब मुमकिन है। चाहे वो लाइफस्टाइल में हल्का-फुल्का बदलाव हो या फिर IVF जैसी एडवांस टेक्नोलॉजी।
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FAQ: Sperm Meaning in Hindi
1. क्या स्पर्म टेस्ट से पुरुष बांझपन का पता चलता है?
हाँ, स्पर्म टेस्ट यानी (semen analysis) से काउंट, मोटिलिटी और आकार की जानकारी मिलती है, जिससे पुरुष की प्रजनन क्षमता का अनुमान लगाया जाता है।
2. स्पर्म क्या होता है?(Sperm Meaning in Hindi)
स्पर्म (शुक्राणु) पुरुष की वह प्रजनन कोशिका है जो मादा के अंडाणु को निषेचित करके नया जीवन बनाती है।
3. स्पर्म को हिंदी में क्या कहते हैं?
स्पर्म को हिंदी में शुक्राणु कहा जाता है।
4. स्पर्म कितने दिन तक जीवित रहते हैं?
महिला के शरीर में स्पर्म 2–5 दिन तक जीवित रह सकते हैं।
5. स्पर्म की संख्या कम क्यों हो जाती है?
तनाव, खराब खान-पान, धूम्रपान, शराब, हार्मोन की गड़बड़ी और अधिक गर्मी इसके कारण हो सकते हैं।
6. क्या उम्र स्पर्म की गुणवत्ता पर असर डालती है?
हाँ, उम्र बढ़ने के साथ स्पर्म की गुणवत्ता और संख्या दोनों कम हो सकती हैं।




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