स्पर्म काउंट कैसे बढ़ाएं? (How to Increase Sperm Count) 

sperm count kaise badhaye

स्पर्म काउंट का मतलब होता है कि वीर्य में कितने शुक्राणु होते हैं, और यह पुरुषों की प्रजनन क्षमता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। सामान्य स्पर्म काउंट 15 मिलियन से लेकर 200 मिलियन प्रति मिलीलीटर तक होता है।

अगर किसी पुरुष का स्पर्म काउंट 15 मिलियन प्रति मिलीलीटर से कम होता है, तो इसे कम स्पर्म काउंट माना जाता है, जिससे गर्भधारण करना मुश्किल हो सकता है।

सही मात्रा में स्पर्म होने से शुक्राणु के अंडाणु तक पहुंचने और उसे निषेचित करने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे गर्भधारण आसान हो जाता है।

जब स्पर्म काउंट कम होता है, तो बार-बार कोशिश करने के बाद भी गर्भधारण करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए, कम स्पर्म काउंट के कारणों को समझना और इसे बढ़ाने के प्राकृतिक तरीकों (sperm count kaise badhaye) को जानना जरूरी है।

इस ब्लॉग में, डॉ. नमिता कोटिया (आस्था फर्टिलिटी, जयपुर) की सलाह के साथ, स्पर्म काउंट बढ़ाने के सभी पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।

आस्था फर्टिलिटी सेंटर जयपुर के सबसे अच्छे IVF सेंटर्स में से एक है, जहां मरीज की सेहत के आधार पर सबसे भरोसेमंद फर्टिलिटी ट्रीटमेंट और परिणाम दिए जाते हैं।

स्पर्म काउंट घटने के कारण (Causes of Low Sperm Count)

कम स्पर्म काउंट के कई कारण हो सकते हैं। इन कारणों को समझना और इन्हें सही तरीके से दूर करना बहुत जरूरी है। यहां आठ सामान्य कारण दिए गए हैं:

  1. अधिक गर्मी का संपर्क: बार-बार गर्म पानी के टब, सॉना, या टाइट कपड़े पहनने से अंडकोष के आसपास का तापमान बढ़ जाता है। इससे शुक्राणु उत्पादन पर बुरा असर पड़ता है, जिससे स्पर्म काउंट और गुणवत्ता कम हो जाती है।
  2. मोटापा: शरीर में ज्यादा फैट होने से हार्मोन जैसे टेस्टोस्टेरोन का संतुलन बिगड़ जाता है, जो स्पर्म उत्पादन के लिए जरूरी है। फैट कोशिकाएं टेस्टोस्टेरोन को एस्ट्रोजन में बदल देती हैं, जिससे स्पर्म काउंट कम हो जाता है।
  3. धूम्रपान: सिगरेट पीने से शरीर में हानिकारक तत्व प्रवेश करते हैं, जो शुक्राणुओं के डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते हैं और स्पर्म काउंट और गतिशीलता (मोबिलिटी) दोनों को कम कर सकते हैं। धूम्रपान से प्रजनन क्षमता भी प्रभावित होती है।
  4. शराब का अत्यधिक सेवन: ज्यादा शराब पीने से टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो जाता है, जिससे स्पर्म उत्पादन में कमी आती है। शराब से लिवर को नुकसान भी हो सकता है, जो हार्मोन के संतुलन को प्रभावित करता है।
  5. तनाव: लंबे समय तक तनाव रहने से शरीर में कॉर्टिसोल जैसे हार्मोन बनते हैं, जो प्रजनन हार्मोन के संतुलन को बिगाड़ देते हैं। लगातार तनाव से स्पर्म काउंट और गुणवत्ता दोनों पर बुरा असर पड़ता है।
  6. पर्यावरणीय विषाक्त पदार्थ: कीटनाशक, भारी धातु (जैसे सीसा या पारा), और प्लास्टिक के जहरीले पदार्थ (जैसे बीपीए) जैसे हानिकारक रसायनों के संपर्क में आने से प्रजनन तंत्र को नुकसान हो सकता है, जिससे स्पर्म उत्पादन और गुणवत्ता में कमी आ जाती है।
  7. संक्रमण: प्रजनन अंगों में संक्रमण, जैसे कि यौन संचारित संक्रमण (STI), से सूजन या अवरोध हो सकता है, जो स्पर्म काउंट को कम कर सकता है या शुक्राणुओं को निकलने से रोक सकता है। एपिडीडिमाइटिस या ऑर्काइटिस जैसी स्थितियों से शुक्राणु उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
  8. पोषण की कमी: शरीर में जिंक, विटामिन डी, और फोलेट जैसे जरूरी पोषक तत्वों की कमी से शुक्राणु उत्पादन और गुणवत्ता खराब हो सकती है। सही पोषण स्पर्म काउंट और गतिशीलता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इन कारणों को दूर करके, पुरुष अपनी शुक्राणु स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं और गर्भधारण की संभावना बढ़ा सकते हैं।


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स्पर्म काउंट बढ़ाने के प्राकृतिक तरीके (Natural Ways to Increase Sperm Count)

स्पर्म काउंट कैसे बढ़ाएं? (How to Increase Sperm Count) 

स्पर्म काउंट को प्राकृतिक तरीके से बढ़ाने के लिए जीवनशैली में सुधार और कुछ स्वस्थ आदतों को अपनाना जरूरी है। यहां छह आसान और प्रभावी तरीके दिए गए हैं: (sperm count kaise badhaye)

  1. नियमित व्यायाम करें:
    हल्का-फुल्का शारीरिक व्यायाम, जैसे चलना, दौड़ना या हल्का वेट ट्रेनिंग, टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाता है, जो शुक्राणु उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है। इससे रक्त संचार भी बेहतर होता है, जिससे स्पर्म काउंट और गतिशीलता (मोबिलिटी) में सुधार होता है। लेकिन बहुत ज्यादा व्यायाम करने से हार्मोनल असंतुलन हो सकता है, इसलिए संतुलन जरूरी है।
  2. पर्याप्त नींद लें:
    सही मात्रा में नींद (7-8 घंटे) हार्मोन संतुलन के लिए बहुत जरूरी है। पर्याप्त नींद से टेस्टोस्टेरोन का स्तर ठीक रहता है, जो शुक्राणु उत्पादन में मदद करता है। नींद की कमी से हार्मोनल गड़बड़ी हो सकती है, जिससे स्पर्म की संख्या और गुणवत्ता पर असर पड़ता है।
  3. संतुलित आहार लें:
    ऐसा आहार लें जिसमें एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और खनिज प्रचुर मात्रा में हों। हरी पत्तेदार सब्जियां, नट्स, बीज, खट्टे फल, और मछली जैसे खाद्य पदार्थों में जिंक, सेलेनियम, विटामिन सी और ओमेगा-3 फैटी एसिड होते हैं, जो स्पर्म के स्वास्थ्य में सुधार करते हैं। एंटीऑक्सीडेंट्स शुक्राणु कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं और उनके उत्पादन में मदद करते हैं।
  4. तनाव को कम करें:
    लगातार तनाव रहने से कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है, जो टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन में बाधा डालता है और स्पर्म काउंट को कम करता है। ध्यान, योग या गहरी सांस लेने की तकनीकें अपनाकर तनाव को कम किया जा सकता है। इसके अलावा, शौक में समय बिताना या प्रकृति के संपर्क में रहना मानसिक शांति लाता है और हार्मोनल संतुलन को बनाए रखता है।
  5. पर्याप्त पानी पिएं:
    शरीर को हाइड्रेटेड रखना स्वस्थ वीर्य उत्पादन और स्पर्म की गतिशीलता के लिए जरूरी है। पानी की कमी से वीर्य की गुणवत्ता कम हो सकती है, जिससे गर्भधारण की संभावना घट जाती है। रोजाना 8-10 गिलास पानी पीने की आदत बनाएं।
  6. विषैले तत्वों से बचें:
    पर्यावरणीय रसायनों जैसे कि कीटनाशक, भारी धातु और प्लास्टिक से बने उत्पादों में मौजूद बीपीए जैसे हानिकारक तत्वों से दूर रहें। जैविक भोजन को अपनाएं और प्लास्टिक की जगह कांच या स्टील के कंटेनरों का उपयोग करें। हानिकारक रसायनों से दूर रहकर स्पर्म काउंट में सुधार किया जा सकता है।

इन आदतों को अपनाकर आप प्राकृतिक रूप से स्पर्म काउंट और प्रजनन क्षमता में सुधार कर सकते हैं।

स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए आवश्यक पोषक तत्व (Essential Nutrients to Increase Sperm Count)

पोषक तत्वयह कैसे मदद करता हैकौन से शाकाहारी भोजन में पाया जाता है 
जिंक (Zinc)टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन को बढ़ावा देता है और शुक्राणुओं की गुणवत्ता में सुधार करता है।कद्दू के बीज, चने, मूंगफली, तिल, राजमा, और मूंग दाल
विटामिन सी (Vitamin C)ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करता है, शुक्राणुओं को क्षति से बचाता है और उनकी गतिशीलता (मोबिलिटी) में सुधार करता है।आंवला, संतरा, नींबू, अमरूद, कीवी, और पपीता
फोलेट (Folate)शुक्राणु में डीएनए संश्लेषण के लिए आवश्यक है और स्वस्थ शुक्राणु उत्पादन को बढ़ावा देता है।हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, मेथी), चने, दाल, बीन्स, और मूंगफली
विटामिन डी (Vitamin D)टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ाता है और कुल मिलाकर शुक्राणु की गुणवत्ता में सुधार करता है।फोर्टिफाइड अनाज, मशरूम, और फोर्टिफाइड दूध
कोएंजाइम क्यू10 (Coenzyme Q10)शुक्राणुओं की गतिशीलता और ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाता है, जिससे प्रजनन क्षमता में सुधार होता है।मूंगफली, सोयाबीन, पालक, और तिल
सेलेनियम (Selenium)एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है और शुक्राणुओं को नुकसान से बचाने के साथ उनकी गुणवत्ता में सुधार करता है।सूरजमुखी के बीज, ब्राजील नट्स, ओट्स, और साबुत अनाज
ओमेगा-3 फैटी एसिड (Omega-3 Fatty Acids)शुक्राणु झिल्ली की संरचना को बेहतर बनाता है, जिससे शुक्राणु की गतिशीलता और गुणवत्ता में सुधार होता है।अलसी के बीज, अखरोट, सोयाबीन, और चिया बीज

ये पोषक तत्व स्पर्म उत्पादन और गुणवत्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।

कौन से फल से शुक्राणु जल्दी बनते हैं?

शुक्राणु उत्पादन के लिए एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर फल जैसे कि संतरा, नींबू, कीवी, और स्ट्रॉबेरी बहुत फायदेमंद होते हैं। इनमें विटामिन सी की मात्रा अधिक होती है, जो शुक्राणुओं की गुणवत्ता और गतिशीलता में सुधार करता है।

जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes to Improve Sperm Count)

स्पर्म काउंट बढ़ाने (sperm ko kaise badhaye) के लिए जीवनशैली में कुछ बदलाव करना बहुत फायदेमंद हो सकता है। यहां तीन महत्वपूर्ण बदलाव दिए गए हैं:

  1. धूम्रपान छोड़ें और शराब का सेवन कम करें:
    धूम्रपान और अत्यधिक शराब पीने से शुक्राणुओं को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे उनकी गुणवत्ता और संख्या घट जाती है। धूम्रपान से शुक्राणुओं के डीएनए को नुकसान होता है, जिससे प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है। शराब का अधिक सेवन हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ता है, जिससे टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो सकता है। इसलिए धूम्रपान छोड़ना और शराब का सेवन कम करना प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने के लिए जरूरी है।
  2. स्वस्थ वजन बनाए रखें:
    सही वजन बनाए रखने से शरीर का हार्मोनल संतुलन ठीक रहता है, जिससे शुक्राणु उत्पादन में सुधार होता है। मोटापा टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम कर सकता है और शुक्राणु उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। नियमित व्यायाम और संतुलित आहार से वजन को नियंत्रित रखना न केवल शरीर के लिए अच्छा होता है, बल्कि शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता को भी बढ़ाता है।
  3. ढीले कपड़े पहनें:
    तंग कपड़े पहनने से अंडकोष के आसपास का तापमान बढ़ सकता है, जिससे शुक्राणु उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ता है। तंग अंडरवियर या पैंट पहनने से अंडकोष में गर्मी बढ़ सकती है, जिससे शुक्राणु की संख्या घट सकती है। इसलिए, हमेशा ढीले और आरामदायक कपड़े पहनें और अंडकोष को ठंडा रखने के लिए लंबे समय तक गर्मी के संपर्क में आने से बचें।

इन जीवनशैली बदलावों को अपनाकर आप अपनी प्रजनन क्षमता और स्पर्म काउंट को स्वाभाविक रूप से बढ़ा सकते हैं।

Treatments for Low Sperm Count

चिकित्सीय उपाय (Medical Treatments for Low Sperm Count)

अगर प्राकृतिक उपाय और जीवनशैली में बदलाव से स्पर्म काउंट नहीं बढ़ता है, तो चिकित्सा उपचार की जरूरत हो सकती है। यहां तीन प्रमुख उपचार दिए गए हैं:

  1. हार्मोनल थैरेपी (Hormonal Therapy): अगर हार्मोनल असंतुलन की वजह से स्पर्म काउंट कम है, तो हार्मोनल थैरेपी से टेस्टोस्टेरोन और अन्य प्रजनन हार्मोन्स के स्तर को संतुलित किया जा सकता है, जिससे शुक्राणु उत्पादन में सुधार होता है।
  2. सर्जिकल प्रक्रियाएं (Surgical Procedures): अगर किसी रुकावट या वरिकोसील (अंडकोष में सूजी हुई नसें) के कारण स्पर्म काउंट कम है, तो सर्जरी द्वारा इस रुकावट को दूर किया जा सकता है, जिससे शुक्राणु प्रवाह बेहतर होता है।
  3. असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (Assisted Reproductive Technology – ART): बहुत कम स्पर्म काउंट के मामलों में IVF या IUI जैसे तकनीकी तरीकों का उपयोग करके शुक्राणुओं को सीधे अंडाणु तक पहुंचाया जा सकता है, जिससे गर्भधारण की संभावना बढ़ती है।

Conclusion

आस्था IVF जयपुर में, हम समझते हैं कि प्रजनन समस्याओं से जूझ रहे दंपत्तियों को शारीरिक और भावनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

डॉ. नमिता कोटिया और उनकी टीम विशेषज्ञ सलाह और व्यक्तिगत देखभाल प्रदान करती है, जिससे पुरुषों को अपने स्पर्म काउंट (Low Sperm Count) को बढ़ाने और प्रजनन क्षमता को सुधारने में मदद मिलती है।

उन्नत उपचार और समग्र दृष्टिकोण के साथ, हमारा लक्ष्य उन दंपत्तियों के लिए सबसे उच्च सफलता दर प्रदान करना है जो गर्भधारण की कोशिश कर रहे हैं।

प्रजनन समस्याओं के लिए आस्था IVF पर भरोसा करें, जहां आपको पूरी देखभाल और सहानुभूतिपूर्ण समर्थन मिलेगा।

आज ही आस्था IVF से संपर्क करें और अपनी प्रजनन यात्रा में पहला कदम उठाएं!

Q1. सबसे ज्यादा स्पर्म क्या खाने से बनता है?

स्पर्म उत्पादन बढ़ाने के लिए जिंक, विटामिन सी, फोलेट और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियां, नट्स, बीज, मछली, और खट्टे फल शुक्राणु उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार करते हैं।

Q2. बिना दवाई के स्पर्म काउंट कैसे बढ़ाएं? (Increase Sperm Count)

बिना दवाइयों के स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए स्वस्थ आहार लें, नियमित व्यायाम करें, तनाव कम करें, पर्याप्त नींद लें, और धूम्रपान व शराब का सेवन बंद करें। ढीले कपड़े पहनने से भी अंडकोष का तापमान सामान्य रहता है, जिससे शुक्राणु उत्पादन में सुधार होता है।

Q3. ज्यादा से ज्यादा शुक्राणु कैसे बनाएं?

ज्यादा शुक्राणु बनाने के लिए जिंक और विटामिन डी जैसे पोषक तत्वों का सेवन करें, नियमित व्यायाम करें, और हानिकारक रसायनों से बचें। साथ ही, शरीर को हाइड्रेटेड रखें और तनाव से दूर रहें।

Q4. बच्चा पैदा करने के लिए स्पर्म काउंट कितना होना चाहिए?

सामान्य गर्भधारण के लिए प्रति मिलीलीटर वीर्य में 15 मिलियन से अधिक स्पर्म होना जरूरी है। कम स्पर्म काउंट (15 मिलियन से कम) होने पर गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है, लेकिन उपचार से मदद मिल सकती है।

Picture of Dr Namita Kotia
Dr Namita Kotia
Dr. Namita Kotia (MBBS, MS – Obstetrics & Gynaecology) is a highly experienced IVF and Infertility Specialist with over 15 years of expertise in Assisted Reproductive Technology (ART). She completed her post-graduation from S.N. Medical College, Jodhpur, affiliated with the University of Rajasthan. As the Director of Aastha Fertility Care, Jaipur, Dr. Kotia specializes in advanced fertility treatments such as IVF, IUI, ICSI, and fertility preservation. Her patient-centric approach, combined with clinical excellence, has helped hundreds of couples achieve their dream of parenthood. Dr. Namita Kotia is also active in reproductive health education and awareness initiatives.
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Dr Namita Kotia
Dr. Namita Kotia (MBBS, MS – Obstetrics & Gynaecology) is a highly experienced IVF and Infertility Specialist with over 15 years of expertise in Assisted Reproductive Technology (ART). She completed her post-graduation from S.N. Medical College, Jodhpur, affiliated with the University of Rajasthan. As the Director of Aastha Fertility Care, Jaipur, Dr. Kotia specializes in advanced fertility treatments such as IVF, IUI, ICSI, and fertility preservation. Her patient-centric approach, combined with clinical excellence, has helped hundreds of couples achieve their dream of parenthood. Dr. Namita Kotia is also active in reproductive health education and awareness initiatives.

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